शाम कुछ और है

शाम कुछ और है

शाम कुछ और है (तर्ज-जाने क्यों लोग मोहब्बत किया करते हैं) शाम कुछ और है,सुबह कुछ और हैं,बात आश्चर्य की,जाने वह...