नाम प्रभु का लिया नहीं।
जीवन सफल बना ले (तर्ज – अल्ला ही अल्ला किया करो दुःख न किसी को) नाम प्रभु का लिया नहीं।धर्म […]
जीवन सफल बना ले (तर्ज – अल्ला ही अल्ला किया करो दुःख न किसी को) नाम प्रभु का लिया नहीं।धर्म […]
सदा ही सहाई (तर्ज – दयानन्द के वीर सैनिक बनेंगे) प्रभु नाम तेरा सदा ही सहाई।यह वो शै है जो
धर्म कर्म मत छोड़ो (तर्ज – झनक झनक मोरी बाजे पायलिया) धर्म कर्म मत छोड़ो रे मनवा।प्रीत की रीत न
प्रभु की बातें प्रभु ही जाने (तर्ज- तुम्हीं हो माता पिता तुम्हीं हो…) बता गये हैं यह लोग स्यानेप्रभु की
सबका रखवाला दिल में बसा ले। (तर्ज – सुख के सब साथी दुःख में न कोई) सबका रखवाला दिल में
प्रभु परमेश्वर ने संसार सजाया है। (तर्ज-तुम रूठ के मत जाना) १. इक बाग लगाया है।प्रभु परमेश्वर ने संसार सजाया
गायत्री महिमा वरदायिनी हे गायत्री माता।गुणगान तेरे संसार गाता। १. रक्षा करे प्रभु प्राणों से प्यारा।दुःख दर्द नाशक दुनियाँ से
क्योंकि वह ओम् ओम् है (तर्ज – यह इश्क इश्क है इश्क) वह वह ओम् ओम् है ओम् ओम् ।ओम्
हर इक नज़ारा है ओम् का (तर्ज – न तो कारवाँ की तलाश है) यह जो सिलसिला है जहान कायह
त्रैतवाद सिद्धान्त (तर्ज-बुरा जो देखन में चला) १. इस सारे संसार में मूल तत्त्व हैं तीन।ब्रह्म जीव और प्रकृति वेद
श्रद्धा की भेंट लेकर आया हूँ द्वार तेरे श्रद्धा की भेंट लेकर आया हूँ द्वार तेरेयह भेंट मेरी भगवन् स्वीकार
प्रभु के दर आ बन्देया (तर्ज – नटवर नागर नंदा भजो रे मन गोबिन्दा) यह जग रैन बसेरा प्रभु के
बेसहारों का सहारा (तर्ज- हम को भी दे दे सहारा दो जहाँ के बादशाह) बेसहारों का सहारा कौन है संसार
प्रेम भाव से मिलकर जग में रहें सभी इनसान । (तर्ज – देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई
काहे को तूने प्रभु नाम न गाया। (तर्ज- पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई) काहे को तूने प्रभु नाम न