विषय वासनाओं में क्यों जिन्दगी बिगाड़े हैं।

विषय वासनाओं में क्यों जिन्दगी बिगाड़े हैं।

विषय वासनाओं में क्यों जिन्दगी बिगाड़े हैं। विषय वासनाओं मेंक्यों जिन्दगी बिगाड़े हैं।अपने ही आप अपनीजड़ों को उखाड़े है।। साफ सुथरी चादर...