विख्यात

हाथ रखे वेद, वेद-धर्म को विख्यात रखे।

दयानन्द बावनीकवि : दुलैराय काराणी रखी आन हिन्दवान की हाथ रखे वेद, वेद-धर्म को विख्यात रखे।तात रखी तुमने ही ख्यात हिन्दुस्थान की।। जात...
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