रहने को भवन वस्तर भोजन सुख धन से मिलें हज़ार ।

रहने को भवन वस्तर भोजन सुख धन से मिलें हज़ार ।

धन से प्रीति (तर्ज - ऐ जाने चमन तेरा गोरा बदन) रहने को भवन वस्तर भोजन सुख धन से मिलें हज़ार ।क्यों...