यज्ञशिष्ट भोजी

यज्ञशिष्ट भोजी,ब्रह्मानन्द भोगी।

यज्ञशिष्ट भोजी,ब्रह्मानन्द भोगी। यज्ञशिष्ट भोजी,ब्रह्मानन्द भोगी।खुद भर न खा,रहेगा तू पाप बचा ।। १11 सहजतः बांट के खा,स्वाद पा खुद खुद का।सब...