भक्ति

तू कर बन्दगी और भजन धीरे-धीरे, मिलेगी प्रभु की शरण धीरे-धीरे।।

भक्ति तू कर बन्दगी और भजन धीरे-धीरे।मिलेगी प्रभु की शरण धीरे-धीरे।।तू कर बन्दगी और ……… ।।1।। दमन इन्द्रियों का तू करता चला...
भक्ति ओ३म् को न याद किया जीवन बरबाद किया।हाय रे मानव यह क्या किया तूने यह क्या किया।। कोमल सा फूल प्यारे...
भक्ति एक बार भजन करले, मुक्ति का यतन कर ले।कट जायेंगे जन्म-मरण, प्रभु का चिन्तन कर ले।।एक बार भजन कर ले…… यह...
भक्ति जगत में चिन्ता मिटी उन्हीं की।जो तेरे चरणों में आ चुके हैं।वो ही हमेशा हरे भरे हैं।जो तेरे चरणों में...