ब्रह्मन् स्वराष्ट्र में हों

ब्रह्मन् स्वराष्ट्र में हों

ब्रह्मन् स्वराष्ट्र में हों ब्रह्मन् स्वराष्ट्र में हों,द्विज ब्रह्म तेजधारी।क्षत्रिय महारथी हों,अरिदल विनाशकारी।। 1।। होवें दुधारु गौएं,पशु अश्व अशुवाही।आधार राष्ट्र की हों,नारी...