बड़े भाग्य से मनुष्य देही मिली है

बड़े भाग्य से मनुष्य देही मिली है

बड़े भाग्य से (तर्ज चली….चली…. रे पतंग मेरी) बड़े भाग्य से मनुष्यदेही मिली हैखा खा जूनियों की मार,जीव हुआ लाचार,चोट...
बड़े भाग्य से (तर्ज चली….चली…. रे पतंग मेरी) बड़े भाग्य से मनुष्यदेही मिली हैखा खा जूनियों की मार,जीव हुआ लाचार,चोट सीने...