निर्माता

धर्म-कर्म-ध्याता नवयुग निर्माता तू ही

दयानन्द बावनीकवि : दुलैराय काराणी तू न होता तो धर्म-कर्म-ध्याता नवयुग निर्माता तू ही।भव्यतम भारत के भाग्य का विधाता तू।। तेज तेरा ताता...
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