धर्मयुक्त नेक रहें

धर्मयुक्त नेक रहें, मन्त्र एक निज विरोध तजें,

धर्मयुक्त नेक रहें, मन्त्र एक निज विरोध तजें धर्मयुक्त नेक रहें, मन्त्र एक।निज विरोध तजें,सम अन्तःकरण हों ।। टेक ।। हविष्य समान...