तन-मन-जीवन सेवाभाव भरा

तन-मन-जीवन सेवाभाव भरा

तन-मन-जीवन सेवाभाव भरा तन-मन-जीवन सेवाभाव भराउर-अंतर गीताप्रेम अनन्य गहरा कर्मयोगी-कर्मठ निपुण-निरहंकारी बड़ेसेवा-सत्संग ज्ञानयज्ञ आहुति देने चले प्रेम-भक्ति रथ जगन्नाथ खींचनेदेखो कितने-कितने हाथ हैं...