जो ज़िन्दगी पुरुषार्थ के साँचे में ढली है।

जो ज़िन्दगी पुरुषार्थ के साँचे में ढली है।

पुरुषार्थी बनो (तर्ज-तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा…) जो ज़िन्दगी पुरुषार्थ के साँचे में ढली है।तूफान का मुँह मोड़ के रख दे...