गयौ उजड़ि लखीना बाग काटि गये

गयौ उजड़ि लखीना बाग काटि गये

गयौ उजड़ि लखीना बाग काटि गये गयौ उजड़ि लखीना बाग काटि गये हरे-हरे काटि गयेखुदमाली स्वर्ग समानदेश था अपना, दुनियाँ...