कहीं झूठ कहीं छल

कहीं झूठ कहीं छल

कहीं झूठ कहीं छल (तर्ज-कभी धूप कभी छाओं) कहीं झूठ कहीं छलकहीं झूठ तो कहीं छल।नर तन चोला फिर न मिलेगाइन बदियों...