कर रहे हैं दखल

भोग तृष्णा है प्रबल,कर रहे हैं दखल

भोग तृष्णा है प्रबल,कर रहे हैं दखल भोग तृष्णा है प्रबलकर रहे हैं दखलसत्य क्यों तज दियाभोग में धंस गया जीवन हुआ...