कबीर के दोहे

माटी कहे कुम्हार सूं तू क्या रौंदे मोय।

माटी कहे कुम्हार सूं तू क्या रौंदे मोय। माटी कहे कुम्हार सूं तू क्या रौंदे मोय।एक दिन ऐसा आएगा मैं रोदूंगी...