ओ3म् खं ब्रह्म।

ओ3म् नारायणः, ओ3म् खं ब्रह्म।

“आत्म ब्रह्म में” ओ3म् नारायणः, ओ3म् खं ब्रह्म।ईशावास्यमिदं सर्वम्… (2)।। टेक।। सृष्टि यज्ञ सुरचना, संधि संधि अर्चना।समीपतम है हितकर, ब्रह्म ज्योतित है...
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