ऋषि दयानन्द ने आकर जगाये

ऋषि दयानन्द ने आकर जगाये

ऋषि दयानन्द ने आकर जगाये ऋषि दयानन्द ने आकरजगाये आकर जगायेहम दुःखों से छुडायेरे प्राण बचाये।। टेक।।चारों तरफ गठ कटे...