जपो ओम् नाम प्राणों का प्राण है।
जपो ओम् नाम (तर्ज – चलो चलें माँ सपनों के गाओं में) जपो ओम् नाम प्राणों का प्राण है।दुःखों को […]
जपो ओम् नाम (तर्ज – चलो चलें माँ सपनों के गाओं में) जपो ओम् नाम प्राणों का प्राण है।दुःखों को […]
भक्तों का नमस्कार (तर्ज – मत्थे ते चमकन वाल मेरे बन्नड़े दे) भक्तों का होवे नमस्कार प्रभु तेरे चरणों में।झुकता
धर्म की महिमा अपार (तर्ज-वक्त के दिन और रात वक्त के कल और आज) धर्म की महिमा अपार। धर्म पर
कर ईश्वर से प्यार मानव कर ईश्वर से प्यार। कर ईश्वर से प्यार मानव कर ईश्वर से प्यार।संकट मोचन विघ्न
भला क्या नहीं मिलता यह न कहो कि यहाँ ख़ुदा नहीं मिलता।ढूँढ़ने वाले का ही पता नहीं मिलता।यह न कहो
सच्चे शिव का दीवाना (तर्ज-न मैं भगवान् हूँ न मैं शैतान हूँ…) दुष्टों के काल का दीन दयाल का।मैं हूँ
चाहे पुण्य करो चाहे पाप करो (तर्ज-तेरी याद में जल कर देख लिया अब आग में जल कर देंखेंगे) कण
ईश्वर को ध्याओ (तर्ज – हुआ ध्यान में ईश्वर के जो मगन उसे कोई…) सब मिल कर ईश्वर को ध्याओजो
तेरे खेल निराले प्रभु जी तेरे खेल निराले । (तर्ज – ओम् का झंडा आया यह ओम् का झंडा आया)
मेरे मन के गोपाल जपो ओम् ओम् ओम् । (तर्ज – बिना बदरा के बिजुरिया कैसे चमके) मेरे मन के
देव चराचर के उत्पादक सब दुःख दुर्गुण दूर हटा दो। (तर्ज – साधक बन कर करो साधना अमृत का भण्डार
तेरे खेल निराले (तर्ज – ओम् का झंडा आया यह ओम् का झंडा आया) तेरे खेल निराले प्रभु जी तेरे
जीवन सफल बना ले (तर्ज – अल्ला ही अल्ला किया करो दुःख न किसी को) नाम प्रभु का लिया नहीं।धर्म
सदा ही सहाई (तर्ज – दयानन्द के वीर सैनिक बनेंगे) प्रभु नाम तेरा सदा ही सहाई।यह वो शै है जो
धर्म कर्म मत छोड़ो (तर्ज – झनक झनक मोरी बाजे पायलिया) धर्म कर्म मत छोड़ो रे मनवा।प्रीत की रीत न