अरे मन चल नहा आएं।

बहे सत्संग की गंगा, अरे मन चल नहा आएं।

सत्संग बहे सत्संग की गंगा,अरे मन चल नहा आएं।बुझी ज्योति जो जीवन की,उसे फिर से जगा आएं।। यही बेला है कर ले...