अपार

जहां वर्ण चार वहां आज तो अपार भयो

दयानन्द बावनीकवि दूलेराय काराणी संगठन जहां वर्ण चार वहां आज तो अपार भयो।हिंदू-हिंदुत्व में भेद-भाव को बढ़ायो है॥ आपस की फूट चली छूट...
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