स्वतंत्रता संग्राम में आर्यसमाज के भजनोपदेशक

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तप भूमि है हमारी कहिये न जेलखाना । सन्तोष प्राप्त करते तसले पै गाके गाना ॥ सामर्थ्य से अधिक हम जो नित्य काम करते । रहता नहीं हमारे आनन्द का ठिकाना ॥ हमको पसन्द आया यह अर्क दाल का है । मिट्टी समेत कच्ची छः रोटियों का खाना ||

स्वतंत्रता संग्राम में आर्यसमाज का सबसे अधिक सहयोग रहा है। उस जमाने में आर्यसमाजी होना ‘आ बैल मुझे मार’ की कहानी को दर्शाता था। अमूमन क्रांतिकारी आर्यसमाजियों के यहां गुप्त रूप से ठहरा करते थे। क्रांतिकारियों के साथ एक दल ओर था :- ‘भजनोपदेशक’, जिनका कार्य अत्यंत महत्व का था। परंतु लेखकों ने उनके योगदान को इतिहास में समुचित स्थान नहीं दिया। इसको इतिहासकारों की कृतघ्नता कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। आजादी के आंदोलन में आर्यसमाज के अनेक वीरों का बलिदान हो गया। इन वीरों को तैयार करने वाले तथा आर्यसमाज का सबसे अधिक प्रचार करने भजनोपदेशक ही थे।

हरयाणा प्रांत से

मास्टर नत्थू सिंह जी,

चौधरी भोलाराम तेवडी़ सोनीपत,

प्रथम किसान आंदोलन में भाग लिया। दोनों ने लाहौर, देहली की जेलों में कठोर यातनायें भोगी। इनका छ: वर्ष का कारावास रहा। पाठक गण समझ सकते हैं अपनी आवाज उठाना उस जमाने में मौत को निमंत्रित देने जैसा था। इन्हीं में से श्री स्वामी भीष्म जी महाराज थे। स्वामी जी वर्ष 1917 – 1933 तक हिंडन नदी के तट पर आश्रम बना रहे। सर्वविदित है यह आश्रम सामान्य आश्रम नहीं था अपितु क्रांतिकारियों की रुप रेखा तैयार करने का एक स्थान था। यहाँ भगत सिंह, राजगुरु, चन्द्रशेखर गुप्त रूप से ठहरा करते थे। भगत सिंह इत्यादि की फांसी के पश्चात अंग्रेजी पुलिस क्रांतिकारियों की छानबीन कर रही थी तो उनको स्वामी भीष्म जी पर भी संदेह हुआ! उन्होंने यह स्थान छोड़कर घरोंडा में ठिकाना बनाया। यहाँ भी स्वामी रामेश्वरानन्द जी महाराज के संग मिलकर गुरुकुल की स्थापना करी। स्वामी जी ने यहाँ अंग्रेजी राज में तिरंगा फहरा दिया, जब कि मधुबन पुलिस का ट्रेनिंग सैंटर बहुत ही कम दूरी पर था। जांटी गांव के पंडित शिवलाल जी अरावली क्षेत्र में वेद पाठशाला चलाते रहे। अंग्रेज भक्त लोग इनकी सूचना पुलिस को देते थे। आजादी के पश्चात पंडित जी बदरपुर वेद पाठशाला चलाते रहे।

पंडित बोहतराम जुड़ोला, स्वामी विद्यानन्द, स्वामी केवलानन्द इत्यादि क्रांतिकारी भजनोपदेशक थे। जीवन पर्यंत आर्यसमाज का प्रचार किया।पारसौल के चौधरी तेजसिंह मलिक के क्रान्तिकारी भजन सुनकर अंग्रेज बौखला गये। इनको पकड़ कर जेल में डाल दिया। इनके उपर अभियोग चला परंतु जेल से जल्द ही रिहा हो गये। चौधरी रामगोपाल छारा जैसे कर्मठ सेनानी इनकी प्रेरणा से कार्य करते रहे।

ऐसे ही झज्जर के बुपनिया गांव के श्री पंडित बालमुकुंद जी थे। यें रेलवे में लोकोपायलट थे। वर्ष 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड के पश्चात आप ने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। स्वतंत्र प्रचार करके आजादी की धूम मचा दई। इन्हीं के गुरु श्री स्वामी नित्यानंद जी महाराज ने झज्जर के घंटा घर पर तिंरगा फहरा दिया। खबर सुनते ही रोहतक जिले में हड़कंप मच गया। अंग्रेज मुखबिर इन पर निगरानी रखते थे। लेकिन कभी हाथ नहीं आए। इनके गुरु चौधरी ईश्वर सिंह गहलोत भी पीछे नहीं थे। स्वतंत्रता का जमकर प्रचार किया। कुँवर जौहरी, नित्यानंद जैसे देशभक्त वीर इन्होंने तैयार किये।

हैदराबाद के सत्याग्रह में विशाल जुलूस रोहतक की सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन कर रहा था तो मुसलमानों ने अचानक हमला कर दिया। इसमें गुरुकुल भैंसवाल से चौधरी स्वरुपलाल, हरिद्वारीसिंह तथा गुरुकुल के 35 ब्रह्मचारी बुरी तरह घायल हो गए। इन्हीं में जींद जिले पंडित प्रभुदयाल जी को भी गहरी चोटे आई। स्वामी नित्यानंद जी का सिर फुट गया। स्वस्थ होते ही यें आर्यवीर हैदराबाद में कुच कर गये।

पंडित प्रभुदयाल जी लिखते हैं हमारे गले में हारमोनियम, ढोलक वादक के गले में ढोलक, चलते फिरते हैदराबाद की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे। हमें पकड़ कर जेलों में डाल दिया। निजाम सरकार सिमेंट मीली आटे की रोटी जब दिया करती उससे अधिक हम परिश्रम कर पसीना बहा दिया करते थे। स्वामी नित्यानंद जी ने हैदराबाद के वीरों पर भजन बनाया :- इतिहासो में नाम रहेगा उन्हीं का संसार में!

धर्म खिलारी जा पाये हैदराबाद में!!

इस भजन में सभी जत्थेदारों के नाम व गांव वर्णित है। श्री भक्त फूलसिंह जी के मना करने पर भी जसराणा के कुंवर जौहरी हैदराबाद पहुंच गए। समझाने पर कुंवर साहब रोहतक आकर सत्याग्रही भेजने रहे। पंडित भूरा राम चिडी़, पंडित बलवीर झाभर खांडा अलेवा सत्याग्रह में गए । इसी आंदोलन में चौधरी पृथ्वी सिंह बेधड़क को बेड़ियों में जकड़ दिया गया। इसका मुख्य कारण था चौधरी जी ने दूषित भोजन पर आवाज उठाई थी। उनका गीत आज भी चीख कर कह रहा है :-

‘देखी साहुकारी निजाम तेरी जेल में’

निजाम के सिपाही बौखला गये। इनको बेड़ियों में जकड़ दिया गया। जेल से छूटने के घर लोटे ओर छ: महिने तक उपचार हुआ।

आर्यसमाज पर “मूर्ति पूजा विरोधी” तथा ना ना प्रकार के आक्षेप करने वालों पर उन्होंने गीत लिखा :-

‘दुनिया के अनाड़ी ना गये हैदराबाद में’

स्वतंत्रता आंदोलन में रोहतक के चौधरी मेहर सिंह भजनोपदेशक को 6 बार जेल हुई। कांग्रेस का जुलूस रोहतक की सड़कों पर निकल रहा था, कि अंग्रेज भक्त लोगों ने इन पर हमला कर दिया। नाम लिखना में उचित नहीं समझता। लोहारु नवाब इस क्षेत्र में आर्यसमाज की सभी गतिविधियों को कुचल रहा था। धर्मान्धता में चूर नवाब के सिपाहियों ने जींद जिले के धारी भजनी को खाट से बांध कर बुरी तरह पीटा।

इसके पश्चात स्वामी नित्यानंद वहां सत्याग्रह का माहौल तैयार करते रहे। आर्यसमाज नें हैदराबाद नवाब की तरह लोहारु के धर्मान्ध नवाब को भी घर में घुस कर रौंद डाला। सभी प्रतिबंध हटाये गये। वहां आर्यसमाज नियत हुई, मंदिर बना। इसी क्षेत्र में पटियाला एवं जींद रियासत के विरुद्ध प्रजामंडल आंदोलन हुए।

इनमें चौधरी धर्मपाल भालोठिया,

महाशय मौजीराम मिसरी वाले,

पंडित मनसाराम त्यागी पंचगामा,

शिवकरण डोहकी,

चौधरी भरत सिंह इत्यादि प्रमुख भजनीक थे।

स्वतंत्रता के पश्चात पंजाब सरकार ने हरयाणा वासियों पर बलात् गुरुमुखी थोप दी। आर्यसमाज ने हिन्दी बचाओ आंदोलन चलाया। इस आंदोलन में भी भजनोपदेशकों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। इनमें स्वामी नित्यानंद,दादा बस्तीराम के शिष्य महाशय रामपत वानप्रस्थी तथा महाशय प्यारेलाल भापडोदा ने दो बार जेल की यात्रा की। स्वामी भीष्म जी को चंडीगढ़ से गिरफ्तार करके सिंतबर में नाभा जेल में भेज दिया। चौधरी नर सिंह भापडोदा को रोहतक जेल में भेज दिया गया। जगतराम बस्तीराम की जोड़ी भी पृथक जेलों में डाल दी गई। कुँवर जौहरी सिंह जी कृतव्य समझकर जत्थे का नेतृत्व करते हुए जेल में चले गए। श्री चन्द्रभान आर्य भजनोपदेशक जींद को हिसार के किन्नर नाडा़ गांव से गिरफ्तार कर लिया गया। इनके साज बाज का भगवान मालिक था। पृथ्वी सिंह बेधड़क जी को रोहणा गांव से गिरफ्तार किया गया। चौधरी बेगराज भजनोपदेशक को गिरफ्तार करके पहले पहल पुलिस नरेला के बणखंडी में छोड़ आई परंतु अगले रोज रोहतक पहुंच गए और गिरफ्तारी दी। बलवीर झाभर के गिरफ्तारी वारंट कट गए, सभा के निर्देशानुसार आप भूमिगत हो गये। पानीपत से मंगल वैद्य जी को गिरफ्तार करके बोस्टल जेल भेज दिया गया। पंडित ज्योतिस्वरुप, हरलाल मंधार, चौधरी नत्था सिंह, स्वामी रुद्रवेश, ओमप्रकाश वर्मा अलाहर, चौधरी ह्रदयराम, चौधरी मंगतुराम कापडो, पंडित ताराचंद वैदिक, पंडित शिवनारायण डाहौला को जत्थे सहित जेलों में डाल दिया गया। स्वामी जगतमुनी, स्वामी हीरानन्द बेधड़क जी को भी जेलों में डाल दिया। इन सभी भजनोपदेशकों को हिंदी भाषी आंदोलन पर लिखें हुए भजन भी हमारे संग्रह में हैं।

इमर्जेंसी में महाशय रामकुमार आर्य बाघडु वालों को तोशाम के पहाड़ी क्षेत्र में पुलिस छोड़ आई। इनका साज बाज हांसी आर्यसमाज में मिले। इसमें भी बहुत से भजनीक जेलों में डाल दिये गये।

उचाना, शाहपुर कंडेला गांव में प्रचार करते वक्त रामनिवास आर्य पानीपत रामरहीम के अनुयायियों ने हमला कर दिया। आर्यसमाजियों की एकता ने उनको खदेड़ दिया। ऐसे ही डीघल गांव में रामपाल के अंध भक्तों ने जत्थे पर हमला किया।महाशय सुमेर जी कहा करते थे आर्यसमाज का प्रचार करना खाला जी का बाड़ा नहीं था। भजनीक अपनी जान जोखिम में डाल कर प्रचार करते थे।

अमित सिवाहा