स्वामी दयानंद सरस्वती की 202वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ संपन्न
गुरुकुल मुर्शदपुर, ग्रेटर नोएडा में विशेष आयोजन (12 फरवरी 2025)
गुरुकुल मुर्शदपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में आर्य उप प्रतिनिधि सभा, जनपद गौतम बुद्ध नगर के तत्वावधान में स्वामी दयानंद सरस्वती की 202वीं जयंती हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आर्यजन उपस्थित रहे और वैदिक परंपरा के अनुसार यज्ञ, विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
स्वामी दयानंद जी का जीवन: देशप्रेम, वेद प्रेम और ईश्वर प्रेम का प्रेरक संदेश :
कार्यक्रम में आर्य उप प्रतिनिधि सभा, जनपद गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार आर्य ने स्वामी दयानंद जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका सम्पूर्ण जीवन देशप्रेम, वेद प्रेम और ईश्वर प्रेम पर आधारित रहा। यही कारण है कि उनके अनुयायियों ने राष्ट्रवादी क्रांतिकारी आंदोलनों में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
उन्होंने बताया कि आज लगभग 32 देशों में स्वामी दयानंद जी का मिशन सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी, टोक्यो और सिंगापुर जैसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में संस्कृत पर व्यापक स्तर पर शोध कार्य किया जा रहा है। भारत में लगभग 4500 गुरुकुल तथा विदेशों में 400 गुरुकुल स्वामी जी के विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं।
डॉ. आर्य ने कहा कि हमें आलस्य या प्रमाद नहीं दिखाना चाहिए, बल्कि निरंतर जागरूक रहकर राष्ट्र के सामने खड़ी समस्याओं का समाधान स्वामी जी के बताए मार्ग पर चलकर करना होगा।


वैदिक परंपरा और सामाजिक सुधार की आवश्यकता :
डॉ. राकेश कुमार आर्य ने अपने संबोधन में कहा कि सृष्टि के प्रारंभ से ही व्यवस्थाएं वेदों के अनुरूप चलती रही हैं। मनु महाराज ने मनुस्मृति के माध्यम से इस व्यवस्था को सुव्यवस्थित रूप प्रदान किया। महाभारत के पश्चात फैले पाखंड के विरुद्ध आदि शंकराचार्य जी ने महत्वपूर्ण प्रयास किए, और उसके बाद स्वामी दयानंद जी ने वैदिक धर्म की पुनर्स्थापना का महान कार्य किया।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हम फिर से सो गए तो स्थिति हमारे लिए खतरनाक सिद्ध हो सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने भी आर्य समाज को क्रांतिकारी योजना के अनुसार पुनः सशक्त करने का संदेश दिया था।
16 गायत्री मंत्रों से यज्ञ की सरल विधि का संदेश :
भाषा प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष ब्रह्मचारी आर्य सागर ने कहा कि स्वामी दयानंद जी ने यज्ञ की जटिल कर्मकांड प्रक्रिया को सरल बनाते हुए 16 गायत्री मंत्रों से यज्ञ करने की सरल विधि बताई। यह विधि विशेष रूप से गृहस्थ लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी है, जिसे अपनाने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर लगभग 80 दैनिक अग्निहोत्र करने वाले परिवारों को सम्मानित भी किया गया।

सम्मानित प्रमुख व्यक्तित्व :
सम्मानित परिवारों एवं प्रमुख उपस्थित जनों में देव मुनि जी महाराज, गिरीश मुनि जी महाराज, आचार्य दशरथ, महावीर सिंह आर्य, किशन लाल आर्य, पंडित धर्मवीर आर्य, प्रधान विजेंद्र सिंह आर्य, मूलचंद शर्मा, महेंद्री देवी, माता भगवती देवी, श्रीमती ऋचा आर्या, श्रीमती संगीता आर्या, विक्रम आर्य, राकेश शर्मा, बाबूराम आर्य, रविंद्र आर्य, राकेश यादव, राजेंद्र सिंह आर्य, जीतराम आर्य, प्रधान बलबीर सिंह आर्य सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त मेजर वीर सिंह आर्य, जलजीत आर्य, ओमप्रकाश आर्य, सुदेश आर्य, गिरिराज आर्य, अमन आर्य, रविंद्र सिंह आर्य, महेंद्र सिंह आर्य, पूरन सिंह आर्य, रंगीलाल आर्य, गजराज आर्य, हेम सिंह आर्य, वीरेश आर्य, ओमवीर सिंह आर्य, इंजीनियर श्यामवीर आर्य, विजेंद्र सिंह आर्य सहित बड़ी संख्या में आर्य समाज के सदस्य उपस्थित रहे।


दैनिक अग्निहोत्र और पंचमहायज्ञ का आह्वान :
ब्रह्मचारी आर्य सागर ने कहा कि दैनिक अग्निहोत्र प्रत्येक गृहस्थ का पवित्र कर्तव्य है। पंचमहायज्ञ विधि को अपनाकर समाज में सुव्यवस्था एवं नैतिक मूल्यों की स्थापना की जा सकती है।
निष्कर्ष :
गुरुकुल मुर्शदपुर, ग्रेटर नोएडा में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल स्वामी दयानंद सरस्वती की 202वीं जयंती का उत्सव था, बल्कि वैदिक संस्कृति, राष्ट्रभावना और सामाजिक जागरण का एक सशक्त संदेश भी रहा। कार्यक्रम ने उपस्थित जनसमूह को स्वामी जी के आदर्शों पर चलने और समाज सेवा के लिए संकल्पित किया।
🙏नमस्ते जी🙏
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