सुन आर्य समाज के काम सखी
सुन आर्य समाज के काम सखी।
हो मेरा देश, जग का नरेश,
इसे चिन्ता है सुबह शाम सखी ।।1।।
शिक्षा प्रसार हो, किस प्रकार,
लगा रहता है आठो याम सखी ।।2।।
अन्ड वन्ड प्रचण्ड, जो थे पाखंड,
खंड खंड कर दिये तमाम सखी।।3।।
आर्य जाति, धक्के खाती,
इसे दिखलाया सुख धाम सखी।।4।।
जो मिला आज, हमको स्वराज,
था इसका ही प्रोग्राम सखी ।।5।।
दिया छुआछूत का भगा भूत,
किये एक ही खासो आम सखी ।।6।।
मिटे भ्रम भेद, सब पढ़ो वेद,
दुनिया को दिया पैगाम सखी।।7।।
इसके कारण गा रहे भजन,
उपदेशक शोभाराम सखी ।।8।।










