सुखी बसे सन्सार सब
दुखिया रहे न कोय
यह अभिलाषा हम सबकी
भगवन् !! पूरी होय
विद्या-बुद्धि-तेज-बल,
सबके भीतर होय
दूध-पूत-धन-धान्य से
वञ्चित रहे न कोय
(2)
आपकी भक्ति प्रेम से
मन होवे भरपूर
राग-द्वेष से चित्त मेरा
कोसों भागे दूर
मिले भरोसा आप का
हमें सदा जगदीश
आशा तेरे धाम की
बनी रहे मम ईश
(3)
हमें बचाओ पाप से
करके दया दयाल
अपना भक्त बनाय कर
हमको करो निहाल
दिल में दया-उदारता
मन में प्रेम अपार
धैर्य हृदय में धीरज
सबको दो करतार
(4)
नारायण तुम आप हो (1)
कर्म-फल देवन हार
हमको बुद्धि दीजिये
सुखों के भण्डार
हाथ जोड़ विनती करूँ
सुनिये कृपानिधान
साधु-सङ्गत सुख दीजिये
दया नम्रता दान
सुखी बसे सन्सार सब
दुखिया रहे न कोय
यह अभिलाषा हम सबकी
भगवन् !! पूरी होय










