स पुमानर्थवज्जन्मा यस्य नाम्नि पुरःस्थिते । नान्यामंगुलिमभ्येति संख्यायामुद्यतांगुलिः ।। न ऋषियों की तहजीब मिट जाये वीरो ! मिटाये जो इसको उसे तुम मिटा दो ।।
माणिकराव जी हुपला के निवासी थे। इस वीरपुङ्गव ने अपनी भगिनी को मुसलमान बन जाने पर शुद्ध कर लिया । निर्दय मुसलमानों ने इन्हें भी गोली का निशाना बनाया ।










