श्रद्धा सुमन लाए प्रभु तेरे चरणों में हम
उज्जवल करो जीवन प्रभु निष्पाप हो अन्तर्मन ॥ श्रद्धा सुमन…
हम जब भी माया में फँसने लगे
और लोभ मोह में धँसने लगे
सौ सौ दफा रोके कदम, तूने प्रभु हरदम (2) ॥ श्रद्धा सुमन…
सन्मार्ग में जब आने लगे, तेरी दया हम पाने लगे
मन में हुआ विश्वास के, प्रभु राह करेंगे सुगम ॥ श्रद्धा सुमन…
ओ३म् नाम मुख से जपने लगे, प्रीतम प्रभु तुम अपने लगे
चाहत यूँ ही मन में रहे, पाएँ प्रभुके चरनन ॥ श्रद्धा सुमन…
अर्पण कर दें सर्वस्व प्रभु, छोड़ें तृष्णा वैमनस्य प्रभु
रसना भी भक्तिभाव से, गाए तेरी सरगम ॥ श्रद्धा सुमन…
(रसना) जीहा, जीभ, जवान (निष्पाप) पाप रहित, निर्दोष (सन्मार्ग) सत्यमार्ग (वैमनस्य) शत्रुता,
ईर्ष्या, (सुगम) सरल, आसान










