शिक्षा का पावन केंद्र आर्ष गुरुकुल महाविद्यालय : आबू पर्वत (राजस्थान)

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राजस्थान के सुरम्य और शांत वातावरण में स्थित आर्ष गुरुकुल महाविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को जीवित रखने वाला एक जीवंत केंद्र है। स्मृतिशेष त्यागी, तपस्वी एवं कर्मठ संन्यासी पूज्य स्वामी धर्मानन्द जी सरस्वती के संकल्पों से सिंचित यह गुरुकुल आज आधुनिक चकाचौंध के बीच नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महान कार्य कर रहा है।


१. ३६वाँ वार्षिकोत्सव: आस्था और कौशल का संगम

संस्थान के गौरवमयी इतिहास में एक और अध्याय जुड़ने जा रहा है। २२, २३ एवं २४ मई २०२६ (ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी से अष्टमी, विक्रम संवत् २०८३) को गुरुकुल का ३६वाँ वार्षिकोत्सव आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन ब्रह्मचारियों के पुरुषार्थ और गुरुकुल की उपलब्धियों को देखने का एक सुनहरा अवसर है।

  • आध्यात्मिक महायज्ञ: वेद मंत्रों की गूँज के बीच विश्व शांति हेतु महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा।
  • प्रवचन एवं सत्संग: प्रखर विद्वानों द्वारा वेदोपदेश के माध्यम से जीवन दर्शन और धर्म के मर्म को समझाया जाएगा।
  • सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ: विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई ‘नाट्यांजलि’ के माध्यम से पौराणिक कथाओं का मंचन और कलात्मक प्रदर्शन होगा।
  • शौर्य प्रदर्शन: गुरुकुल के छात्र आत्मरक्षा कला और शारीरिक कौशल का प्रदर्शन कर अपनी वीरता और अनुशासन का परिचय देंगे।
  • विद्वत् सम्मान समारोह: यह आयोजन उन विद्वानों को समर्पित है जिन्होंने शिक्षा और समाज सुधार में अपना जीवन अर्पण कर दिया।

२. प्रवेश परीक्षा २०२६: भविष्य निर्माण की ओर पहला कदम

शैक्षणिक सत्र २०२६-२७ के लिए गुरुकुल में कक्षा ६ एवं ७ में प्रवेश की प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी और योग्यता आधारित रखी गई है। अभिभावक ध्यान दें कि प्रवेश के लिए अप्रैल २०२६ के प्रत्येक रविवार को परीक्षा आयोजित की जाएगी:

  • परीक्षा तिथियाँ: ०५, १२, १९ और २६ अप्रैल २०२६।
  • अनिवार्यता: परीक्षा हेतु आने वाले प्रत्येक विद्यार्थी के पास अपना मूल आधार कार्ड होना आवश्यक है।
  • चयन प्रक्रिया: केवल वे छात्र जो प्रवेश परीक्षा में श्रेष्ठ अंक प्राप्त करेंगे, उन्हें ही इस अनुशासित वातावरण में शिक्षा ग्रहण करने का सौभाग्य मिलेगा।

३. गुरुकुल की विशिष्ट कार्यप्रणाली और सुविधाएँ

यहाँ की शिक्षा पद्धति ‘प्राचीन और आधुनिक शिक्षा’ का एक अद्भुत मिश्रण (Blends) है। यहाँ विद्यार्थी केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों से लड़ना सीखते हैं:

  • वैदिक पाठ्यक्रम: विद्यार्थियों को वेद, उपनिषद, व्याकरण और संस्कृत साहित्य का गहन अध्ययन कराया जाता है।
  • अनुशासित दिनचर्या: सूर्योदय से पूर्व जागरण, दैनिक यज्ञ-हवन और सात्विक भोजन यहाँ की जीवनशैली का हिस्सा है।
  • शारीरिक और मानसिक विकास: योग, प्राणायाम के साथ-साथ कबड्डी, खो-खो और एथलेटिक्स जैसे खेलों के माध्यम से छात्रों को बलवान बनाया जाता है।
  • सुरक्षित आवासीय परिसर: पूरा परिसर CCTV कैमरों से सुरक्षित है, जहाँ छात्रों को एक सुरक्षित और पारिवारिक वातावरण मिलता है।
  • चरित्र और राष्ट्र निर्माण: यहाँ छात्रों में आत्मनिर्भरता, सादगी और अटूट राष्ट्रभक्ति के संस्कार भरे जाते हैं, ताकि वे समाज के आदर्श नागरिक बन सकें।

४. अभिभावकों के लिए एक आह्वान

आज के दौर में जब युवा पीढ़ी मोबाइल की लत और कुसंगति की ओर आकर्षित हो रही है, आर्ष गुरुकुल महाविद्यालय उन्हें एक सही दिशा प्रदान करता है। गुरुकुल का मानना है कि संस्कारयुक्त शिक्षा ही एक उज्ज्वल भविष्य की सच्ची नींव है। अपने बच्चों को ऋषि ऋण से उऋण होने के इस पावन कार्य का हिस्सा बनाएँ।


विशेष सूचना एवं संपर्क विवरण

वार्षिकोत्सव के इस पावन अवसर पर आप सपरिवार सादर आमंत्रित हैं। आपकी उपस्थिति ब्रह्मचारियों का उत्साहवर्धन करेगी।

  • संपर्क सूत्र (Contact): 9414589510, 8005940943
  • आयोजक: समस्त न्यासी गण एवं आर्ष गुरुकुल परिवार
  • स्थान व पता: आर्ष गुरुकुल महाविद्यालय, आबू पर्वत (राजस्थान)

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