शीत योग शिविर एवं यज्ञ का हुआ आयोजन : गाजियाबाद

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शीत योग शिविर एवं यज्ञ का भव्य आयोजन

सुसंस्कारित मानव ही राष्ट्र की सच्ची धरोहर है — डॉ. नवनीत प्रिय दास
ध्यान योग से मानसिक तनाव, चिंता एवं भय से मिलता है स्थायी समाधान — मनमोहन वोहरा

गाजियाबाद | रविवार, 14 दिसम्बर 2025
अखिल भारतीय ध्यान योग संस्थान के तत्वावधान में शीत योग शिविर एवं यज्ञ का सफल आयोजन ग्राम कुर्सी, मुरादनगर, गाजियाबाद में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ योग शिक्षक राजेश शर्मा द्वारा ॐ की ध्वनि एवं गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ किया गया। उन्होंने साधकों को सूक्ष्म व्यायाम कराते हुए हाथों, पैरों एवं गर्दन के विभिन्न अभ्यासों तथा उनके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी।

कार्यक्रम के मंच संचालक एवं योग शिक्षक प्रदीप त्यागी ने साधकों को विरेचन क्रिया, आर्ट ऑफ लिविंग भस्त्रिका, प्राणायाम, दीर्घ श्वसन, कपाल शोधन एवं भ्रामरी का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि इन क्रियाओं से तन, मन एवं श्वासों में शांति एवं संतुलन स्थापित होता है।

संस्थान के उपाध्यक्ष मनमोहन वोहरा ने अनुलोम-विलोम प्राणायाम के रहस्यों को समझाते हुए कहा कि भाव, अनुभव एवं प्रार्थना के माध्यम से व्यक्ति रोगमुक्त हो सकता है। उन्होंने साधकों को आँखें बंद कर, मेरुदण्ड एवं गर्दन सीधी रखते हुए ध्यान मुद्रा में बैठाया तथा ज्ञान मुद्रा में ॐ मंत्र का श्वास-प्रश्वास के साथ 11 बार गुंजन कराया। नासिका के अग्रभाग पर ध्यान केंद्रित कराने से साधकों को गहन मानसिक शांति का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा कि नियमित ध्यान से मानसिक तनाव, चिंता, भय एवं हीनभावना से मुक्ति मिलती है।

संस्थान के अध्यक्ष के. के. अरोड़ा ने कर्णरोगान्तक प्राणायाम का अभ्यास कराते हुए बताया कि इससे श्रवण शक्ति में वृद्धि होती है।

कार्यक्रम में योगी प्रवीण आर्य, अशोक शास्त्री एवं प्रदीप गुप्ता द्वारा प्रस्तुत ईश्वर भक्ति के भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया, जिसे सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।

संस्कार उपवन के संस्थापक एवं मुख्य वक्ता डॉ. नवनीत प्रिय दास ने कहा कि संस्कार उपवन की स्थापना का उद्देश्य बच्चों को सुसंस्कारित बनाना है, क्योंकि सुसंस्कारित मानव ही राष्ट्र की वास्तविक धरोहर होता है। उन्होंने ऋषिमुख पर्वत पर भगवान राम-लक्ष्मण एवं हनुमान जी की प्रथम भेंट का मार्मिक प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। साथ ही उन्होंने जन्मदिन को मोमबत्ती बुझाकर केक काटने के स्थान पर यज्ञ, गौ-सेवा, लड्डू वितरण एवं आयु के अनुसार दीप प्रज्वलन द्वारा मनाने की प्रेरणा दी।

संस्थान के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक शास्त्री ने तालिवादन एवं हास्यासन कराकर सभी में उत्साह एवं ऊष्मा का संचार किया। इसके पश्चात् साधकों ने ताजे गन्ने के रस का आनंद लिया।

संस्थान के मंत्री दयानन्द शर्मा ने कहा कि योग मन-मस्तिष्क को स्वस्थ रखता है तथा तनावमुक्त जीवन प्रदान करता है

अंत में योग शिक्षिकाएँ वीना वोहरा, मीता खन्ना, सीमा गोयल, सुमन भारती सहित अन्य साधकों ने वैदिक प्रार्थना एवं शांतिपाठ के साथ कार्यक्रम का समापन किया। तत्पश्चात प्रीतिभोज के उपरान्त साधकों ने प्रसन्नचित्त होकर प्रस्थान किया।

साभार — प्रवीण आर्य


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