शादी जो गुण कर्म अनुसार हो

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शादी जो गुण कर्म अनुसार हो

शादी जो गुण कर्म अनुसार हो,
पति पत्नी में बड़ा प्यार हो।। टेक ।।

विचारों की समानता मिले जहां,
हृदय चमन में सुमन खिले वहां,
आपस में कभी ना तकरार हो,
पतझड़ में भी बसन्त बहार हो ।।1।।

दम्पत्ति में समर्पण की भावना,
पूरी कर देती है, सारी कामना,
आठों पहर आनन्द की बौछार हो,
सुखी जीवन सार्थक संसार हो।।2।।

गृहस्थ में यदि, विरोधाभास है,
आज नहीं तो कल निश्चय नाश है,
मर्यादा में जहां परिवार हो,
धरती पै, स्वर्ग साकार हो।।3।।

पतिव्रता पत्नीव्रती धर्म को,
पालन करें प्रेमी, श्रेष्ठ कर्म को,
पूर्ण परमेश्वर ही, प्राणाधार हो,
भवसागर से, भैया नैया पार हो।।4।।