सेवरा सोये सवेरा जागे

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सेवरा सोये सवेरा जागे

सेवरा सोये सवेरा जागे
जग की दौड़ में सबसे आगे
निश दिन बढ़ते जायेंगे
कभी नहीं दुख पायेंगें।

प्रथम ब्रह्ममुहुरत्त में
उठकर के ऊषा पान करें।
शौचादि से निवृत हो
आसन मर्दन स्नान करे।।

फिर एकान्त स्थान शान्त में
परम पिता का ध्यान करें।
ऐसे श्रद्धालु भक्तों की रक्षा
नित भगवान करें।।

आलस्य और प्रमाद को
त्यागे जग की दौड़ में सबसे आगे
निश दिन बढ़ते जायेंगे
कभी नहीं दुख पायेंगे।।1।

सत्य सार्थक मीठी वाणी
का ही सदा प्रयोग करें।
तन मन वचन आचरण
साधन से सम्पन्न आरोग करें।
तत्परता के साथ पूर्ण
पुरुषार्थ सफल उद्योग करें।
परिश्रम से जो द्रव्य मिले
सन्तोष से उसका भोग करें।
जो नित्य निज कर्तव्य पर लागे
जग की दौड़ में सबसे आगे निशदिन। ।2।

सुखी जनों के साथ मित्रता
दया दीन दुखियों ऊपर।
धर्मात्मा को देख मुदित हो
दुष्ट जनों से उपेक्षा कर।।

श्रवण चतुष्ट आत्मिक उन्नति
सदा पाप करने से डर
कर्मठ धर्म धीर वीरों की
प्रार्थना सुनता है ईश्वर।।

स्वस्थ्य सरल संयमी सुभागे
जग की दौड़ में सबसे आगे।
निश दिन बढ़ते जायेंगे
कभी नहीं दुख पायेंगे ।।३।।

प्राकृतिक द्वश्यनीय द्वश्य
देखों भालों पर तको नहीं।
स्वादिष्ट भोजन षट्रस व्यंजन
खापी लो पर छको नहीं।।

परोपकार के लिये परिक्रमा
पर चालो पर थको नहीं।
जन कल्याणी अन गिन
भाषण दे डालो पर बको नहीं।।

प्रेमी जो शुभ कर्म कमागे
जग की दौड़ में सबसे आगें।
निश दिन बढ़ते जायेंगे कभी
नहीं दुख पायेंगे।।4।।

स्वस्थ्य जीवन

भूख रख कर के खाया कर,
मालिश करके न्हाया कर,
व्रत ब्रम्हचर्य निभाया कर,
ईश्वर के गुण गाया कर,
सही दिन चर्या निभायेगा,
तो रोग पास नहीं आयेगा
भूल चुक से आयेगा तो,
निराश होकर जायेगा।