नारी सशक्तिकरण शिविर का द्वितीय दिवस संपन्न

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नारी सशक्तिकरण शिविर द्वितीय दिवस : मार्शल आर्ट कल्लरी का प्रशिक्षण

प्रातःकाल सूर्योदय के साथ ही सूर्य नमस्कार, योग, प्राणायाम, व्यायाम के द्वारा सभी शिविरार्थियों ने अपने दिन का प्रारंभ किया। योग एवं व्यायाम शिक्षक श्री हरि सिंह आर्य जी के निर्देशन में एक ऊर्जा युक्त वातावरण में सभी ने शारीरिक प्रशिक्षण के अभ्यास को पूर्ण किया। उसके पश्चात केरल से उपस्थित कल्लरी मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षक श्री सुव्रतन सी. एस. एवं उनके दल ने शिविरार्थियों को एक अत्यंत नवीन अनुभव प्रदान करते हुए दक्षिण भारत की केरल की इस सुप्रसिद्ध एवं विलक्षण विद्या को सिखाना प्रारम्भ किया। इसे सभी छात्राओं एवं शिविरार्थियों ने रुचि पूर्वक सीखा। उसके बाद यज्ञ प्रक्रिया प्रशिक्षण सत्र संपन्न हुआ।

दिन के प्रथम बौद्धिक सत्र में आचार्य अंकुर आर्य जी ने ‘इतिहास बोध व शत्रु बोध’ विषय पर अपने शोधपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने इस जानकारी के माध्यम से अपने समाज एवं देश के प्रति एक सामान्य नागरिक के नाते हमारे कर्तव्यों को समझाया। अपने अनुकरणीय इतिहास को समक्ष रखकर, उससे सीख लेकर देश की उन्नति में बाधक सभी प्रकार के शत्रुओं से सतर्क रहने की सलाह दी।

वहीं आचार्या डॉ सुमेधा जी ने नारीशक्ति में निहित शौर्य भाव को उद्दीप्त करते हुए उन्हें स्वावलंबी तथा सबल बनने की प्रेरणा दी। रामायण के प्रसंगों के माध्यम से भारतीय संस्कृति के उच्च नैतिक आदर्शों की ओर सबका ध्यान आकर्षित किया।

आचार्य डॉ विजयपाल जी प्रचेता ने आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ अष्टाङ्गहृदय के जीवनोपयोगी सिद्धान्तों से सबको परिचित कराया। साथ ही आयुर्वेद सम्मत दिनचर्या को विस्तार से समझाया। आधुनिक दिनचर्या में शामिल हो चुके अनेक विपरीत चलन व अभ्यासों से होने वाली हानियों से परिचित कराया।

सायंकाल के सत्रों में पुनः आचार्य अंकुर आर्य अपने प्रातःकालीन सत्र के विश्लेषण को आगे बढ़ाएँगे। आचार्य विजयपाल जी प्रचेता के भगवद्गीता पर सारगर्भित प्रवचनों के साथ द्वितीय दिवस के बौद्धिक सत्रों का समापन होगा। सायंकाल को फिर से शारीरिक प्रशिक्षण, व्यायाम, लाठी, तलवार-भाले , कल्लरी इत्यादि का अग्रिम अभ्यास संपन्न कराया जाएगा।

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