सावन आया बहना सारी झूलती री
सावन आया बहना सारी झूलती री,
मेरा कहां गया चित का चोर।
सावन सूना पिया बिन है गया री।
नगर हिंडौले बहनों, मेरी गड़ रहे री,
हेरी कहीं मोर मचा रहे शोर,
सावन सूना पिया बिन है गया री।
काले-काले बादल बहनों मेरी छा गये री,
हेरी कहीं बिजली कर रही शोर, सावन सूना…
हरी-हरी खेती बहनों लहलहा रही री,
हेरी कहीं दूब चरै हैं ढोर सावन सूना..
पी-पी पपिहा बहनों, मेरी कर रही री,
हेरी कहीं ठंडी हवा का दौर, सावन सूना…
छोटी-छोटी बुंदिया बहनो,
कहीं पड़ रही री,
हेरी कहीं सावन की है हिलोर, सावन सूना…










