वैदिक संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक चेतना का महापर्व
आर्य समाज द्वारा आयोजित शताब्दी समारोह एवं राष्ट्र रक्षा देव महायज्ञ का यह भव्य और प्रेरणादायक आयोजन 12, 13 और 14 अप्रैल 2026 को अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और वैदिक गरिमा के साथ संपन्न होने जा रहा है। यह तीन दिवसीय समारोह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में वैदिक संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक जागरण को सुदृढ़ करने वाला एक ऐतिहासिक अवसर भी है।
इस विशेष आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज को वैदिक धर्म के मूल सिद्धांतों से जोड़ना, युवाओं में संस्कारों का विकास करना तथा राष्ट्र रक्षा और समाज सेवा के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है। आर्य समाज सदैव से समाज सुधार, शिक्षा, संस्कार और धर्म प्रचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है, और यह शताब्दी समारोह उसी गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है।
देशभर के विद्वानों और आचार्यों की गरिमामयी उपस्थिति
इस समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिष्ठित वैदिक विद्वान, आचार्य, भजनोपदेशक एवं प्रवचनकर्ता अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। उनके प्रेरणादायक प्रवचन और वैदिक संदेश श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति समर्पण की नई प्रेरणा देंगे।
भजन और प्रवचन के माध्यम से वैदिक जीवन शैली, मानव मूल्यों, राष्ट्र प्रेम और समाज सेवा के महत्व को सरल एवं प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और वैचारिक जागरण का एक महोत्सव सिद्ध होगा।
प्रथम दिवस : राष्ट्र रक्षा देव महायज्ञ एवं शोभा यात्रा
समारोह का शुभारंभ 12 अप्रैल को प्रातः राष्ट्र रक्षा देव महायज्ञ, भजन एवं वैदिक प्रवचन के साथ होगा। यज्ञ के माध्यम से विश्व शांति, राष्ट्र सुरक्षा, समाज कल्याण और मानव उत्थान की मंगलकामना की जाएगी।
इसके पश्चात ध्वजारोहण, ध्वजगान और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम आयोजित होगा। अपराह्न में एक भव्य शोभा यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, युवा और धर्मप्रेमी सम्मिलित होंगे। यह शोभा यात्रा क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और वैदिक चेतना का संदेश प्रसारित करेगी।
रात्रि में भजन एवं प्रेरणादायक प्रवचन का विशेष सत्र रहेगा, जिसमें विद्वान आचार्य वैदिक धर्म के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करेंगे।
द्वितीय दिवस : शांति, भक्ति और ज्ञान का संगम
समारोह के दूसरे दिन 13 अप्रैल को प्रातः देव महायज्ञ, भजन-प्रवचन, शांति पाठ एवं प्रसाद वितरण का कार्यक्रम रखा गया है। इस दिन श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कृति, नैतिकता और वैदिक सिद्धांतों पर विस्तृत प्रवचन सुनने का अवसर प्राप्त होगा।
अपराह्न और रात्रि सत्र में भजन-कीर्तन तथा वैदिक प्रवचन का आयोजन होगा, जिससे वातावरण पूर्णतः भक्तिमय और आध्यात्मिक बना रहेगा।
तृतीय दिवस : पूर्णाहुति एवं समापन समारोह
समारोह के अंतिम दिन 14 अप्रैल को प्रातः देव महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ कार्यक्रम का समापन चरण प्रारंभ होगा। इस दिन भजन, प्रवचन, शंका समाधान और प्रसाद वितरण का विशेष आयोजन रहेगा।
रात्रि में धन्यवाद ज्ञापन, शांति पाठ और जयघोष के साथ इस भव्य एवं ऐतिहासिक समारोह का समापन किया जाएगा। यह समापन श्रद्धालुओं के मन में धर्म और राष्ट्र के प्रति नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करेगा।
समाज के लिए प्रेरणा का केंद्र
यह आयोजन समाज में धर्म, संस्कार, राष्ट्रभक्ति और वैदिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पहल है। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों से सपरिवार उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने का आग्रह किया है।
पता: आर्य समाज, बैरगनिया, जिला सीतामढ़ी, बिहार
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