सत्संग
सत्संग नहीं करेगा,
प्रभु को नहीं भजेगा।
प्रभु के बिना ये जीवन,
सूना पड़ा रहेगा।।
एक दिन का है यह बचपन,
दो दिन है तेरा यौवन,
एक दिन का है बुढ़ापा,
बस चार दिन का जीवन।
हीरा ये जन्म तेरा,
फिर से नहीं मिलेगा।।
प्रभु के बिना ये जीवन……..
आया है बाँध मुट्ठी,
जाएगा हाथ खाली,
गुलशन नहीं ये तेरा,
तू तो है सिर्फ माली।
बोएगा बीज जैसे,
वैसा ही फल चखेगा।।
प्रभु के बिना ये जीवन…….
कुछ सोच ले ओ पगले,
जीवन में क्या किया है,
दुनियाँ से लिया कितना,
दुनियाँ को क्या दिया है।
व्यवहार रूप तेरा,
संग-संग तेरे चलेगा।।
प्रभु के बिना ये जीवन……..










