सत्कर्मों से मिली जिन्दगानी

0
9

सत्कर्मों से मिली जिन्दगानी

जो माने समझे वही है सुजानी ॥

आ रहा है इकपल इक जा रहा है

कोई सुख तो कोई दुःख पा रहा है

ये कर्मों का लेखा ही, जीवन कहानी ॥ जो जाने…

मन विषयों में उलझा रहा है

प्रभु हैं निकट तू दूर जा रहा है

कैसी है तेरी, ये नादानी ॥ जो जाने…

है दूर मंजिल राह अजानी

चला जो सुपथ समझो वही ज्ञानी

साधें जीवन को, साधु सन्त ध्यानी ॥ जो जाने….

दो दिन की है तेरी जिन्दगानी

कहीं व्यर्थ में ना जाए जवानी

पाले जीवन में, तू नेकनामी ॥ जो जाने…

(नेकनामी) कीर्ति, यश

तर्ज: लफ्जों की है ये ज़िन्दगानी