आस्था
सारे जहाँ के मालिक, तेरा ही आसरा है,
राजी हैं हम उसी में, जिसमें तेरी रज़ा है।।
सारे जहाँ के मालिक, तेरा ही आसरा है….।।1।।
हम क्या बतायें तुझको, सब कुछ तुझे खबर है,
हर हाल में हमारी, तेरी तरफ नजर है।
किस्मत है वो हमारी, जो तेरा फैसला है,
सारे जहाँ के मालिक, तेरा ही आसरा है….।।2।।
हाथों को हम दुआ की, खातिर में लायें कैसे,
सजदे में तेरे आकर, सिर को झुकायें कैसे।
मजबूरियाँ हमारी, सब तू ही जानता है,
सारे जहाँ के मालिक, तेरा ही आसरा है….।।3।।
रो कर कटे या हँसकर, कटती है जिन्दगानी,
तू गम दे या खुशी दे, सब तेरी मेहरबानी।
तेरी खुशी समझकर, सब गम भुला दिया है,
सारे जहाँ के मालिक, तेरा ही आसरा है….।।4।।
दुनियाँ बना के मालिक, जाने कहाँ छिपा है,
आता नहीं नजर तू, बस एक यही गिला है।
भेजा है इस जहाँ में, जो तेरा शुक्रिया है,
सारे जहाँ के मालिक, तेरा ही आसरा है….।।5।।










