सप्त पदी के सात कदम (वैदिक विवाह के पश्चात् पति-पत्नी केसम्बन्ध)
सप्त पदी के सात कदम,
जीवन पथ पर चलेंगे हम,
मिल करके दोनों प्राणी-
व्रत से नहीं टलेंगे हम,
पहला पग यह अन्न के लिये है
यथोचित प्रसन्न के लिये है
दूजा पग बलवान हो तन,
तीजा पुष्ट ज्ञान और धन
चौथा फूलें फलेगें हम,
ब्रत से नहीं टलेगे हम ।। 1 ।।
पांचवा पग उत्तम सन्तान हो,
देश भक्त धार्मिक विद्वान हो,
छटा कदम देश काल अनुसार,
स्वास्थ प्राप्त अनुकूल व्यवहार
नित्य कर्म में ढलेंगे हम,
ब्रत से नहीं टलेंगे। ।2।।
सातवां पग विश्व मैत्री के लिये,
सौहृदयता से आगे बढ़िये,
सद्व्यवहार अपनायेंगे,
सबको मित्र बनायेंगे,
किसी को नहीं खलेंगे हम,
ब्रत से……. ।।3।।
प्रधान अंग सप्त पदी विवाह का,
समझो मूल कारण उत्साह का,
तन से मन और धन से,
अपने निजि आचरण से,
छले जायें ना छलेगे हम,
ब्रत से नहीं टलेंगे हम ।।4।।










