🌿 एक शिक्षाप्रद कथा 🌿
🏹 राजा का जंगल में प्रवेश
एक बार की बात है, एक राजा अपने काफिले के साथ शिकार के लिए जंगल में गया। लेकिन दूर-दूर तक कोई शिकार नहीं दिखा, इसलिए वे और अंदर की ओर बढ़ते गए। चलते-चलते वे एक घने जंगल में पहुँच गए, जहाँ कुछ डाकू छिपे हुए थे। जैसे ही राजा उनके ठिकाने के पास पहुँचा, पास के एक पेड़ पर बैठे तोते ने ज़ोर से कहा –
🦜 “पकड़ो-पकड़ो! एक राजा आ रहा है, इसके पास बहुत सारा सामान है। लूटो-लूटो! जल्दी आओ!”
तोते की आवाज़ सुनकर सभी डाकू राजा की ओर दौड़ पड़े। ख़तरा भाँपकर राजा और उसके सैनिक भाग खड़े हुए। वे बहुत दूर निकल आए और एक विशाल पेड़ के नीचे आराम करने के लिए रुके।
🌿 दूसरा तोता और उसका स्वागत
जैसे ही राजा पेड़ के पास पहुँचा, वहाँ बैठे दूसरे तोते ने कहा –
🦜 “आओ राजन! हमारे साधु महात्मा की कुटी में आपका स्वागत है। अंदर आइए, जल ग्रहण कीजिए और विश्राम कीजिए।”
राजा यह सुनकर हैरान रह गया। उसने सोचा, “कैसे एक ही जाति के दो तोते इतना अलग व्यवहार कर सकते हैं?”
राजा ने साधु की कुटिया में प्रवेश किया और उन्हें प्रणाम कर सारी बात बताई। फिर उसने जिज्ञासावश पूछा –
🤔 “ऋषिवर, इन दोनों तोतों के व्यवहार में इतना अंतर क्यों है?”
📖 साधु महात्मा की सीख
साधु ने धैर्यपूर्वक राजा की बात सुनी और मुस्कुराते हुए बोले –
🧘♂️ “राजन, यह केवल संगति का प्रभाव है। जो जिस वातावरण में रहता है, वह वैसा ही बन जाता है। डाकुओं के साथ रहने वाला तोता उन्हीं की भाषा बोलता है, और संतों के साथ रहने वाला तोता विनम्र और सत्कार करने वाला बन गया है।”
🔹 “अर्थात, मूर्ख भी विद्वानों के साथ रहकर ज्ञानी बन सकता है, और विद्वान यदि मूर्खों की संगति में रहता है, तो वह भी धीरे-धीरे मूर्खता की ओर बढ़ने लगता है। इसलिए संगति को हमेशा सोच-समझकर चुनना चाहिए।”
✨ शिक्षा जो हमें इस कथा से मिलती है
✅ अच्छी संगति हमें जीवन में आगे बढ़ाती है।
✅ बुरी संगति हमें पतन की ओर धकेल देती है।
✅ हमारे विचार, शब्द और कर्म संगति से प्रभावित होते हैं।
✅ बुद्धिमान व्यक्ति को हमेशा सत्संगति (अच्छे लोगों की संगति) में रहना चाहिए।
💡 “संगत से गुण आत है, संगत से गुण जात।
बाँस बंस में बैठ के, सुरसरी होय न जात॥”
(अर्थ: जैसे गंगा का जल बाँस की नली में बहने से गंदा नहीं हो जाता, वैसे ही अच्छी संगति से व्यक्ति में अच्छे गुण आ जाते हैं और बुरी संगति से अच्छे गुण समाप्त हो जाते हैं।)
🎯 निष्कर्ष
हमारी संगति हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करती है। अगर हम अच्छे विचारों और अच्छे लोगों के साथ रहेंगे, तो हम भी अच्छे बनेंगे। यदि हम बुरी संगति में पड़ेंगे, तो हमारी सोच और आचरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसलिए हमें हमेशा सोच-समझकर संगति का चयन करना चाहिए। 🌿✨










