सदा जो सुसंगत में आते रहेंगे, विवेकी स्वयं को बनाते रहेंगे।

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सत्संग

सदा जो सुसंगत में आते रहेंगे।
विवेकी स्वयं को बनाते रहेंगे।।
मिलेगी नहीं शान्ति उनको कभी भी।
जो परमात्मा को भुलाते रहेंगे।।

बनेंगे कभी मुक्त जीवन में वे ही।
जो चाहों को अपनी घटाते रहेंगे।।
सदा जो सुसंगत में आते रहेंगे……..

उन्हें ही वह सुख-सिन्धु स्वामी मिलेंगे।
जो दुःखियों को सुख देते जाते रहेंगे।।
उन्हीं की बनी और बनती रहेगी।
जो बिगड़ी किसी की बनाते रहेंगे।।
सदा जो सुसंगत में आते रहेंगे…….

जो कुछ दीखता है रहेगा ना सब दिन।
कहाँ तक यहाँ मन लगाते रहेंगे।।
‘पथिक’ अपने में अपने प्रीतम को पाकर।
महोत्सव निरन्तर मनाते रहेंगे।।
सदा जो सुसंगत में आते रहेंगे……..