सच्ची लगन तुमसे लगी, भक्त हूँ तेरा
सच्ची लगन तुमसे लगी, भक्त हूँ तेरा
आज मैं आनन्द में रहूँ, नाम लूँ तेरा
दाता का धन तो व्यर्थ ना जाये
प्रभु-बैंक में सूद भी कमाये
क्यों ना बांधूँ मस्तक पे दान का सेहरा?
आज मैं आनन्द में रहूँ, नाम लूँ तेरा
सच्ची लगन तुमसे लगी, भक्त हूँ तेरा
आज मैं आनन्द में रहूँ, नाम लूँ तेरा
सच्चा विद्वान् भूखा मरेगा (लेकिन)
धनपति का ना एहसान लेगा
लक्ष्मी को सरस्वती-केतू ना देगा
आज मैं आनन्द में रहूँ, नाम लूँ तेरा
सच्ची लगन तुमसे लगी, भक्त हूँ तेरा
आज मैं आनन्द में रहूँ, नाम लूँ तेरा
वो धनी कितना है भाग्यशाली !
जिसके घर आता विद्वान् आली
जो हैं कोषाध्यक्ष उन्हें स्वार्थ ने घेरा
आज मैं आनन्द में रहूँ, नाम लूँ तेरा
सच्ची लगन तुमसे लगी, भक्त हूँ तेरा
आज मैं आनन्द में रहूँ, नाम लूँ तेरा
दो प्रकार के धनवान् सच्चे
साधु-संतों के जो जाते सदके
अजातशत्रु का भी जिज्ञासु है चेला
आज मैं आनन्द में रहूँ, नाम लूँ तेरा
सच्ची लगन तुमसे लगी, भक्त हूँ तेरा
आज मैं आनन्द में रहूँ, नाम लूँ तेरा










