सबके मालिक-सबके पालक ओ जग के करतार
सबके मालिक-सबके पालक
ओ जग के करतार
प्रभु जी !! तेरी लीला है अपरम्पार
ओ अविनाशी !! घट-घट वासी
भेद तेरा ना पाया
सबकी नजरों में रह कर भी
नजर कहीं ना आया
पर, तेरा जो हो जाये
तुझको हर रंग में वो पावे
करे तेरा ही दीदार
प्रभु जी !! तेरी लीला है अपरम्पार
बिन माँगे दे मुफ्त सभी को, हवा-रोशनी-पानी
दान करे और जतलाये ना
गज़ब का है वो दानी
तू सबको देवे दाता
तेरा दिया है हर कोई खाता
है तेरे भेद हजार
प्रभु जी !! तेरी लीला है अपरम्पार
दिन भर दुनिया काम करे
और रात को करे आराम
रात न होती तो हो जाती सबकी बोलो राम
क्या अजब नियम ये तेरा
जाए सांज और आए सबेरा
के हर रोज, सुबह और शाम
प्रभु जी !! तेरी लीला है अपरम्पार
ओ “सेवक” के मालिक
तेरी हर इक बात निराली
हम तो छुट्टियाँ करते हैं पर
तू न बैठे खाली
दिन रात हो, सांज सबेरे
खुले रहते हैं, दफ्तर तेरे
तू सबसे बड़ी सरकार
प्रभु जी !! तेरी लीला है अपरम्पार
प्रभु जी !! तेरी लीला है अपरम्पार
प्रभु जी !! तेरी लीला है अपरम्पार
प्रभु जी !! तेरी लीला है अपरम्पार
रचनाकार :- श्री सेवक जी










