सबका पिता है भगवान
सबका पिता है भगवान,
कैसी महिमा निराली उसकी देख लो।।
रचना रचाने वाला रचना रचा रहा,
रचना रचा रहा नये-नये
खेल नित सबको नचा रहा,
सबको नचा रहा।
पा रहा न कोई उसका पार……।।
नीले गगन पे जड़े हैं सितारे,
जड़े हैं सितारे महिमा अनन्त
कैसे चमकते हैं सारे,
चमकते हैं सारे।
न्यारे शशि और भानु…. ।।
अभय है बेमोल वो
न किसी से भी डरता,
किसी से भी डरता नहीं
पिता-माता उसका जन्मता न मरता,
जन्मता न मरता।
गाता है गीत जहान……।।










