सब बुराइयों की जननी ही शराब है।।

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सब बुराइयों की जननी ही शराब है।।

सब बुराइयों की जननी ही शराब है।।
पीना तो रहा दूर, चर्चा भी खराब है।।

अक्ल की दुश्मन शरारत का यह पानी है।
बोतलों मे बन्द है पर वे नकाब है। ।1।।

लाखों घरों को खाक में इसने मिला दिया।
नाश करने में यह खुद अपना जवाब है।।2 ||

एक बार जिसने यह होठों से छू लई।
खत्म समझो जिन्दगी का ही शबाब है।।3।।

मानों या ना मानो प्रेमी मर्जी आपकी।
इससे तो दूर रहना ही बेहतर जनाब है। ।4।।