ऋषि दयानन्द ने आकर जगाये
ऋषि दयानन्द ने आकर
जगाये आकर जगाये
हम दुःखों से छुडाये
रे प्राण बचाये।। टेक।।
चारों तरफ गठ कटे लुटेरे
बैठे हुये थे मग को घेरे चौफेरे से
वह सब भगाये रे प्राण बचाये।।1।।
भूल से बहुत हमारे भाई बने थे
मुसलमान और ईसाई राहों पै
वापिस वेदों की लाये रे प्राण बचाये।।2।।
कहा ऋषि ने शुद्र और नारी
विद्या पढने के अधिकारी नारी
और शुद्र को वेद पढाये रे प्राण बचाये ।।3।।
प्रेमी महर्षिवर का संदेश देते रहे
दुनियां को हमेशा जैसा समझा,
सब समझायें रे, प्राण बचाये।।










