विराट शोभायात्रा एवं विद्यालयों की भागीदारी संपन्न
मऊ, उत्तर प्रदेश: ऋषि दयानंद सरस्वती की 121वीं जयंती के अवसर पर आर्य समाज, मऊ द्वारा एक भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें नगर के विभिन्न डीएवी शिक्षण संस्थानों एवं आर्य वीर दल के युवा सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में वैदिक संस्कृति, शिक्षा, और राष्ट्रभक्ति के प्रति जागरूकता फैलाना था। इस शोभायात्रा ने नगरवासियों को ऋषि दयानंद के महान विचारों और आर्य समाज के सिद्धांतों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस विशाल शोभायात्रा में दयानंद बल विद्या मंदिर, डीएवी इंटर कॉलेज, डीएवी बालिका इंटर कॉलेज और डीएवी रामपुर चकिया विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शोभायात्रा में ऋषि दयानंद सरस्वती के संदेशों को प्रचारित करने वाले बैनरों के साथ छात्र-छात्राएं कदम से कदम मिलाकर चले। इस यात्रा के दौरान वैदिक भजनों, राष्ट्रभक्ति के नारों और ऋषि दयानंद के संदेशों से संपूर्ण वातावरण गुंजायमान हो उठा। नगरवासियों ने भी इस आयोजन का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
आर्य वीर दल का शौर्य प्रदर्शन संपन्न
आर्य समाज के युवा संगठन आर्य वीर दल ने इस अवसर पर विशेष शौर्य प्रदर्शन प्रस्तुत किया, जिसने लोगों को विशेष रूप से आकर्षित किया। आर्य वीर दल के वीरों ने आत्मरक्षा के कौशल, शस्त्र संचालन और शारीरिक दक्षता से जुड़े विभिन्न करतबों का प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों में लाठी, जूडो-कराटे और योगासन का प्रदर्शन किया गया, जिससे युवाओं में आत्मनिर्भरता और अनुशासन की भावना जागृत हुई।
आर्य वीर दल के शाखा नायक श्रेयांश आर्य, अनिकेत यादव, रत्नेश मौर्य, उमंग वर्मा, आर्यन, दिव्यांशु समेत अन्य आर्यवीरों ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन युवा आर्य वीरों ने अपने अनुशासन और परिश्रम से दर्शकों को प्रेरित किया।
इस शोभायात्रा में बृजेश सिंह(प्रधान),प्रशांत रत्नम सिंह(मंत्री); अंतरंग सदस्य में उदय प्रताप आर्य,सुमित राय आदि सदस्य उपस्थित रहे।

ऋषि दयानंद के विचारों का प्रचार
इस शोभायात्रा ने नगरवासियों को आर्य समाज के सिद्धांतों और ऋषि दयानंद के योगदान से अवगत कराया। ऋषि दयानंद सरस्वती ने सत्यार्थ प्रकाश ग्रंथ के माध्यम से समाज को अंधविश्वास, कुरीतियों और अशिक्षा से मुक्त करने का संदेश दिया था। उनके इन्हीं विचारों को इस शोभायात्रा में प्रचारित किया गया।
शोभायात्रा में प्रमुख रूप से डीएवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य देव भास्कर तिवारी, दयानंद बल विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य श्री मुरलीधर शर्मा, और अन्य अध्यापकगण उपस्थित रहे। उन्होंने छात्रों को वैदिक संस्कृति एवं भारतीय मूल्यों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।

नगरवासियों की सहभागिता और उत्साह
इस आयोजन को नगरवासियों का भरपूर समर्थन मिला। बड़ी संख्या में लोगों ने शोभायात्रा में भाग लिया और ऋषि दयानंद के विचारों के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। इस शोभायात्रा ने समाज में नैतिक उत्थान, वैदिक ज्ञान और राष्ट्रप्रेम की भावना को बल दिया।

निष्कर्ष
ऋषि दयानंद की 121वीं जयंती पर मऊ में आयोजित यह भव्य शोभायात्रा एवं शौर्य प्रदर्शन एक ऐतिहासिक आयोजन बन गया। इससे समाज में वैदिक संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के प्रति नई चेतना का संचार हुआ। आर्य समाज के इस प्रयास से युवाओं में वैदिक शिक्षा और अनुशासन की भावना मजबूत होगी, जिससे वे आत्मनिर्भर और जागरूक नागरिक बन सकेंगे।
इस प्रकार, यह आयोजन न केवल ऋषि दयानंद सरस्वती के प्रति श्रद्धांजलि थी, बल्कि समाज में नैतिक उत्थान और जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी था।
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