राज्यस्तरीय पुरोहित प्रशिक्षण शिविर, परली

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वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः।

म. दयानन्द द्विजन्मशताब्दी एवं आर्य समाज के ९५० वर्ष पर

महाराष्ट्र आर्य प्रतिनिधि सभा द्वारा आर्य समाज, परली वैजनाथ के सहयोग से

-* राज्यस्तरीय पुरोहित प्रशिक्षण शिविर –

सोमवार २५ नवम्बर से रविवार १ दिसम्बर २०२४ / स्थान श्रद्धानंद गुरुकुल आश्रम परली

प्रिय संस्कारप्रेमी सज्जनो !

समाज व राष्ट्र के नवनिर्माण में सुयोग्य पुरोहित का सर्वाधिक योगदान रहता है। सामान्य लोग व यजमान पुरोहित को ईश्वर के प्रतिनिधि के रुप में देखते हैं। पुरोहित, गुरु व आचार्य जो कहते व करते हैं, उन्हीं की बातों को सत्य मानकर लोग उनका अनुकरण करते रहते हैं। यदि पुरोहित बिगड गया, तो सबकुछ मिट्टी में मिल गया….। अतः योग्य विद्वान पुरोहित का बडा महत्व है। इसलिए समाज को संस्कारक्षम बनाने व वैदिक षोडशसंस्कार के प्रसार हेतु योग्य पुरोहितों का होना जरूरी है। आज के बदलते परिवेश में तर्कबुद्धि रखनेवाला समाज भी पौराणिक पूजा पाखण्ड से ऊब चुका है। इसी कारण आज यज्ञीय संस्कार कर्मों में उनका विश्वास नही रहा। ऐसी अवस्था में वैदिक संस्कारों का वैज्ञानिक विवेचन कर उनका शुद्ध सरल रूप बतानेवाला पुरोहित वर्ग हो, तो समाज निश्चित ही योग्य दिशा में कदम उठायेगा ।

सम्प्रति योग्य पुरोहितों की संख्या घटती जा रही है। संस्कारेच्छु लोग पुरोहितों के अभाव में इच्छा होते हुए भी विवाह, नामकरण, अन्त्येष्टि आदि वैदिक सोलह संस्कारों का अनुष्ठान कर नहीं पाते। परिसर में पुरोहित न होने से बाहर से पुरोहित बुलाना कठिन होता है। इसी कारण वैदिक संस्कारों का प्रचार व प्रसार नहीं हो रहा है। ऐसी अवस्था में आर्य समाज का नैतिक व सामाजिक कर्तव्य बनता है कि वे अपनी आर्य समाजों में वैतनिक अथवा अवैतनिक पुरोहित रखें। पुरोहितों के निर्माणार्थ प्रान्तीय सभा गत कई वर्षों से राज्यस्तर पर पुरोहित प्रशिक्षण शिबिरों का आयोजन करती है। इस वर्ष भी दि.२५ नवम्बर से १ दिसम्बर २०२४ तक निम्नलिखित मार्गदर्शक विद्वानों की उपस्थिति में पुरोहित प्रशिक्षण शिविर संपन्न हो रहा है।

प्रमुख मार्गदर्शक पं. राजवीरजी शास्त्री (सोलापूर)

भजनोपदेशक – पं. प्रतापसिंहजी चौहान

सह मार्गदर्शक – आचार्य सत्येंद्रजी, पं. प्रशांतकुमार शास्त्री, पं. लक्ष्मणराव आर्य गुरुजी,

डॉ. वीरेंद्रजी शास्त्री, डॉ. अरुण चव्हाण, डॉ. नयनकुमार आचार्य, प्रा. चंदेश्वरजी शास्त्री, पं. दयानंद शास्त्री

* योगासन व प्राणायाम – स्वामी विद्यानंदजी, सोमेंद्र शास्त्री (राष्ट्रीय योगप्रशिक्षक), काशिनाथ आर्य

शिविर में प्रातः ४.३० से लेकर रात्रौ ९.३० तक की व्यस्त दिनचर्या में योगासन प्राणायाम, बृहद् यज्ञ विधि, १६ वैदिक संस्कार, नित्य नैमित्त्यिक कर्म, शुद्ध मंत्रोच्चार, प्रवचन, भजन आदि के साथ ही वैदिक सिद्धान्तों का प्रशिक्षण दिया जाएगा ।

अतः इस पुरोहित बनने के इच्छुक महानुभाव इस पुरोहित प्रशिक्षण शिविर में सम्मिलित होवे। प्रत्येक आर्य समाज कम से कम ५ प्रशिक्षणार्थियों को शिविर में अवश्य भेजें। प्रशिक्षणार्थी दि. २४ नवम्बर को सायंकाल तक शिविरस्थान पहुँचे।

विशेष

१) प्रवेशार्थी के लिए नाममात्र शुल्क रु.३००/- रखा गया है।

२) महिला प्रशिक्षणाथियों के लिए निवास की स्वतन्त्र व्यवस्था की गयी है।

३) प्रशिक्षणार्थी आते समय ऋतु अनुकुल वस्त्र, ओढना बिछौना, थाली, लोटा, कापी, पेन, म. दयानन्द कृत ‘संस्कारविधि’ ग्रंथ साथ लावे। कीमती वस्तुएं न लावें ।

भवदीय :–

स्वामी विद्यानंद – प्रधान

लखमसी वेलानी – कार्यकारी प्रधान

प्रा. अर्जुनराव सोमवंशी – मंत्री

रंगनाथ तिवार – कोषाध्यक्ष

राजबीर शास्त्री – शिबिर प्रमुख

जुगलकिशोर – प्रधान

लोहिया उग्रसेन राठौर – मंत्री

देविदास कावरे- कोषाध्यक्ष

आर्य समाज, परली वैजनाथ

महाराष्ट्र आर्य प्रतिनिधि सभा

*संपर्क एवं नोंदणी : लक्ष्मण आर्य गुरुजी (९४२०२६९९२४), रंगनाथ तिवार (९४२३४७२७९२)