राजनीति में यदि नहीं राष्ट्रनीति सब व्यर्थ।
राजनीति में यदि नहीं
राष्ट्रनीति सब व्यर्थ।
कोई कंस न बन सके
फिर से सर्व समर्थ।
नहीं राष्ट्र से कुछ
बड़ा करो खूब श्रृन्गार।
देश भक्त को सौंप दो
नौका की पतवार।
पछताना पड़ जायगा
गलत किया मतदान।
भस्मासुर को दो नहीं
शिवशंकर- वरदान।
खुल कर निज मतदान
का देना पानी खाद।
जले पाप की होलिका
बचे पुण्य-प्रह्लाद।
काम काज सब छोड़
कर करो प्रथम मतदान।
कलियुग में मतदान ही है
सर्वोत्तम दान।
देकर पानी खाद फिर
रखो राष्ट्र-अम्लान ।
लौहपुरुष को सौंप दो
फिर से हिन्दुस्थान।
लोकतन्त्र में वोट ही
शक्ति-भक्ति-पहचान।
यही सही अवसर सुनो
मत चूको चौहान।
बचा स्वत्व के’उदय’
को बनकर पन्नाधाय।
शक्ति भक्ति सारी
जगो गंगा गीता गाय।










