प्यारे आजा प्रभु के चरणों में, जीवन ना व्यर्थ गँवारे
तर्ज: जारे जारे उड़ जारे पंछी
प्यारे आजा प्रभु के चरणों में, जीवन ना व्यर्थ गँवारे
मद में पड़ा है क्या रे, क्यूँ ना ये जीवन तेरे वश में ॥ प्यारे आजा…
क्यूँ वाणी मधुर ना हुई, तूने दिल दुखाए कई
ढली प्रीत दुःख की आहों में ॥ प्यारे आजा…
स्वार्थ में खो गई मति, रह गया तू होकर दुःखी
काँटे बिछाए राहों में ॥ प्यारे आजा…
आलस में डूबा रहा, किस्मत से जूझा रहा
बँधी जंजीर पाँवों में ॥ प्यारे आजा…
हीरा जनम ना रहा, कौड़ी के बदले गया
हारी बाजी मन के दावों में ॥ प्यारे आजा…
तू करले प्रभुका स्मरण, साफ करले मन का दर्पण
खोज प्रभु को मन के भावों में ॥ प्यारे आजा..
कर ईश चिन्तन मनन, कर उसका अनुकरण
गुण कर्म और स्वभावों में ॥ प्यारे आजा…
(आह) शोक, आर पीड़ा, दुःखकी साँस (मति) बुद्धि










